नई दिल्ली (एडीएनए)। देश की हर एयर स्ट्रिप पर कुछ लाख खर्च कर वीआईपी और विमान यात्रियों की जान बचायी जा सकती है। बस इस पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है।
विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत ने देश में बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या इस तरह के हादसे रोके जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि अजित पवार की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि महाराष्ट्र के बारामती की एयर स्ट्रिप पर कोई ऐसी व्यवस्था या उपकरण नहीं था जिससे पायलट को रनवे का सही अंदाजा हो पाता। देश भर में ऐसी 150 से ज्यादा एयर स्ट्रिप हैं जहां ऐसी कोई सुविधा नहीं है, उप्र में भी ऐसी 12 एयर स्ट्रिप मौजूद हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या देश के दूसरे मुख्यमंत्री और वीआईपी चुनावों और अन्य मौकों पर इन्हीं स्ट्रिप पर लैंड और टेकऑफ करते हैं। इनमें उप्र की सैफई एयर स्ट्रिप भी इनमें से एक है जो बहुत व्यस्त रहती है। ऐसे में हमेशा वीआईपी-वीवीआईपी और ऐसी स्ट्रिप में उतरने वाले हवाई यात्रियों की जान को खतरा बना रहता है।
ऐसी किसी भी एयर स्ट्रिप पर दो तरह के सिस्टम किसी भी विमान की लैंडिंग और टेकऑफ के समय काम करते हैं, खासकर लैंडिंग के समय इनकी खास जरूर होती है। एक इंस्ट्रूमेंट लैडिंग सिस्टम (आईएलएस) है जिसमें ज्यादा खर्चा होता और इसका मेंटीनेंस भी महंगा होता है। एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार हाल में नया GPS APPROACH सिस्टम “GAGAN” इजाद हुआ है जो जीपीएस SATELLITE से काम करता है। इसमें बस कुछ लाख रुपये का खर्चा होता है, इसके बाद मेंटीनेंस का कोई खर्च नहीं है। भारत सरकार की PCU एयरपोर्ट अथॉर्टी के पास जीपीएस अप्रोच बनाने के लिए चार हवाई जहाज और पूरी सुविधा उपलब्ध है, इसका उपयोग करके देश के सभी वीएफआर एयर स्ट्रिप में जीपीएस अप्रोच बनाया जा सकता है। अमेरिका जैसे देश ने अपने हर एयरपोर्ट पर जीपीएस अप्रोच बनवा दी है जिससे हवाई सुरक्षा काफी हद तक बढ़ गई है। अगर केंद्र या प्रदेश सरकारें अपने सभी एयर स्ट्रिप पर GPS APPROACH बनवा लें तो शायद फिर इस तरह किसी VIP की जान नहीं जाएगी और इन एयर स्ट्रिप पर उतरने वाले सभी हवाई यात्री भी सुरक्षित रहेंगे।