नई दिल्ली (एडीएनए)। केंद्र सरकार ने दावा किया थ कि देश के हर बड़े शहर में एयरपोर्ट बनाकर ऐसी व्यवस्था करेंगे कि अब हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए सरकार ने किराया इतना कम करने का दावा किया था कि गरीब किसान भी जहाज में बैठने का सपना पूरा कर सके लेकिन गरीब का यह सपना हवा में ही उड़ गया।
केंद्र और प्रदेश सरकारों ने दावे के अनुसार कई छोटे एयरपोर्ट शुरू भी किए, खासकर यूपी में इसके लिए काफी काम हुआ और देखते-देखते 21 में से 16 से ज्यादा एयरपोर्ट से फ्लाइट शुरू हो गई। लेकिन जितनी तेजी से देश भर में एयरपोर्ट खुले उतनी तेजी से यह बंद होने भी शुरू हो गए। एक के बाद एक लगभग सभी छोटे एयरपोर्ट बंद होते गए, इसके बाद भी एक उम्मीद थी कि सरकार प्रयास करेगी और एयरलाइंस पर दबाव बनाएगी तो फिर से छोटेएयरपोर्टों से उड़ान शुरू होगी और छोटी घरेलू उड़ानों में गरीब भी सफर कर सकेगा। मिडिल ईस्ट में युद्ध से पैदा हुए संकट के बाद यह सपना अब पूरी तरह टूट गया है।
अब गरीब तो क्या अमीर के लिए भी हवाई यात्रा मुश्किल हो गई है, तेल के दाम तेजी से बढ़ने से एयरलाइंस खुद संकट में आ गई हैं। संकट के शुरुआती दौर में एयरलाइंस ने अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद करनी शुरू कीं, धीरे-धीरे 25-30 फीसदी तक अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद हो गईं और अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती शुरू कर दी है। एक माह में 10-15 फीसदी तक घरेलू उड़ानें अलग-अलग एयरलाइंस बंद कर चुकी हैं। अकेले दिल्ली एयरपोर्ट से एक माह के अंदर हर रोज 100-150 घरेलू फ्लाइट कम हो चुकी हैं। खर्चों में कटौती के बाद भी एयर इंडिया ने दा किया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसे करीब 27000 करोड़ का घाटा हुआ है। तेल की कीमतें लगातार बढ़ने से हवाई किराया इतना महंगा हो गया है कि अब गरीब तो क्या अमीरों को भी अपनी यात्राओं में कटौती करनी पड़ रही है। इससे देश का एविएशन सेक्टर खतरे में आ गया है।