नई दिल्ली (एडीएनए)। एयरलाइंस में बढ़ते खर्चे का असर दिखने लगा है, टाटा समूह की एयर लाइंस एयर इंडिया ने तीन सालों के अंदर एक हजार से अधिक कर्मचारियों को बाहर किया है, हालांकि एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन का कहना है कि इन कर्मचारियों को नैतिकता संबंधी मुद्दों के उल्लंघन यानी खराब व्यवहार के कारण निकाला गया है।
दरअसल एयर इंडिया पिछले कुछ सालों से आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में ही एयर इंडिया को 26700 करोड़ का घाटा हुआ है। यह घाटा तमाम प्रतिबंधों, हवाई क्षेत्रों में रोक और बढ़ते तेल कीमतों के कारण हुआ है। ऐसे में कोई भी एयरलाइंस अपने खर्चों में कटौती करेगी। लगभग सभी एयरलाइंस ने अपनी अन्तर्राष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों में कटौती की है, जाहिर फ्लाइट कम होने से यात्री घटे लेकिन पूरा स्टाफ काम कर रहा है जिसका पूरा खर्चा देना पड़ रहा है इसलिए अब एयरलाइंस कुछ न कुछ कारण बताकर कर्मचारियों की छटनी का बहाना खोज रही हैं।
एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पिछले दिनों टाउनहॉल में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नियमों के उल्लंघन और खराब आचरण के कारण सैकड़ों कर्मचारियों को हटाना पड़ा है, इसलिए सभी कर्मचारी अपना आचरण अच्छा रखें। उन्होंने बताया इनमें वह कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने विमान से तस्करी की। हालांकि सीईओ के इस बयान को एविएशन सेकटर में पूरी तरह सही नहीं माना जा रहा है, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते खर्चों के कारण सभी एयरलाइंस को इस तरह के कदम उठाने पड़ सकते हैं।