नई दिल्ली (एडीएनए)। मिडिल ईस्ट युद्ध से चढ़े जेट फ्यूल के दाम हवाई यात्रियों को और झटका दे सकते हैं। युद्ध शुरू होने के कुछ दिन बाद ही एयरलाइंस ने किराया बढ़ाने का दबाव सरकार पर शुरू कर दिया था, इसके बाद तमाम एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज के नाम पर किराया बढ़ा दिया। सीजफायर की घोषणा के बाद जब तेल के दाम गिरे तो माना जा रहा था कि हवाई किराया कम होगा लेकिन शांति वार्ता फेल होते ही तेल के दाम फिर बढ़ने लगे और अब एयरलाइंस फ्यूल सरचार्ज और बढ़ाने पर चर्चा कर रही हैं।
ईरान युद्ध शुरू होते ही एयरलाइंस ने कहना शुरू कर दिया था कि तेल के दाम बढ़े तो उनका खर्चा बढ़ेगा और ज्यादा दिनों तक वह इसे वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। कच्चे तेल के दाम जैसे दी 100 डॉलर पर आए एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया। इस बीच सरकार ने घरेलूु उड़ानों के लिए एयरपोर्ट के खर्चे में 25 फीसदी तक की राहत दी लेकिन एयरलाइंस ने किराया नहीं घटाया। अमेरिका और ईरान के बीच सीज फायर और शांति वार्ता की घोषणा हुई तो तेल के दाम 100 डॉलर से नीचे आ गए, इससे माना जा रहा था कि एयरलाइंस किराया घटाएंगी लेकिन शांति वार्ता फेल हो गई और सीज फायर पर खतरा पैदा हो गया। दोनों तरफ से धमकियों वाले बयानों से तनाव फिर बढ़ गया और तेल के दाम फिर तेजी से बढ़ने लगे।
ताजा स्थितियों में तेल के दाम जिस तरह तेजी से बढ़ रहे हैं एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज और बढ़ाने पर चर्चा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि घरेलू उड़ानों में भले इसका ज्यादा असर न पड़े लेकिन अन्तर्राष्ट्रीय उड़नों का किराया और बढ़ेगा जिसका सीधा असर विदेश यात्रा करने वाले लोगों की जेबों पर पड़ेगा। सरकार ने भी अब इसको लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं, इससे पहले सरकार ने विशेष मौकों पर सीटें महंगी बेचने पर प्रतिबंध लगाया था लेकिन वह भी वापस ले लिया है, यानी संकट और इमरजेंसी के समय एयरलाइंस फिर से जरूरतमंद लोगों को मनमानी किराए पर सीटें बेच सकेंगीं।