नई दिल्ली, (एडीएनए)। RTO दफ्तर का नाम सामने आते ही आम आदमी जेहन में एक ही बात आती है.. पैसा दो और काम कराओ, यानी भ्रष्टाचार का खुला अड्डा....क्या डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) का दफ्तर भी RTO की तरह काम कर रहा है। RTO से फाइल पास होने का मतलब है कोई वाहन सड़क पर दौड़ सकता है लेकिन DGCA तो हवा में फर्राटे भरने की अनुमति देता है, जहां हर वक्त सैकड़ों हवाई यात्रियों की जान को खतरा रहता है। CBI की कार्रवाई को यही गवाही देती है, फिलहाल CBI कई घंटे से DGCA का दफ्तर खंगाल रही है और DGCA का उप महानिदेशक सुशील कुमार गर्ग उसकी गिरफ्त में है।
CBI ने सुशील गर्ग को एक निजी कंपनी के विमान का उड़ान योग्यता का प्रमाणपत्र यानी फिटनेस जारी के लिए 2.5 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। CBI यहीं रुकी उसने उसे रिश्वत देने के आरोप में उसने एक्वी ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सचिन केशव भाने को भी गिरफ्तार कर लिया है। यानी घूस लेने और घूस देने वाले दोनों CBI की गिरफ्त में हैं। CBI ने यह कार्रवाई भाने के साथ कंपनी और अन्य लोगों के खिलाफ रिश्वत मांगने, लेने और देने का मामला दर्ज करने के बाद की है। CBI सूत्रों के अनुसार सुशील गर्ग ने कंपनी के विमानों के लिए उड़ान योग्यता का प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में यह रिश्वत मांगी थी। यही काम आरटीओ में होता है, जहां दलाल बिना वाहन दिखाए रिश्वत देकर फिटनेस शर्टिफिकेट जारी करवा देते हैं। कई बार ऐसी घटनाएं सामने आयी हैं जहां एक्सीडेंट के बाद वाहनों की पड़ताल की गी तो पता चला कि फर्जी तरीके से उसका फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाकर सड़क पर दौड़ाया जा रहा था, यही डर विमानों को लेकर है कि बिना उनके प्रॉपर निरीक्षण रिश्वत के दम पर प्रमाणपत्र पा लिए जाते हैं जो यात्रियों के लिए बेहद खतरनाक साजिश भी है।
CBI ने एफआईआर दर्ज करने के बाद न केवल डीजीसीए के उप महानिदेशक सुशील गर्ग और घूस देने वाले एविएशन कंपनी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है बल्कि रिश्वतखोरी से जुड़े और लोगों के यहां छापेमारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक CBI का एक टीम ने DGCA मुख्यालय भी खंगाला। इस टीम ने विमानों को उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र जारी संबंधी और विमानों की फाइलें देखी हैं और आशंका जाहिर की है कि अंदर बड़ा खेल हो रहा है। CBI पहले भी 18 अप्रैल 2026 को DGCA के उप महानिदेशक मुदावथ देवुला को इसी तरह घूस लेते गिरफ्तार कर चुकी है। वह कई सालों से दिल्ली में तैनात था और इसी तरह फर्जीवाड़े में लिप्त था अब तो आम लोग भी कहने लगे हैं कि DGCA और RTO में कोई अंतर नहीं रह गया है....पैसे दो-काम लो..।