नई दिल्ली, (एडीएनए)। देश में विमान दुर्घटनाओं के बाद एयरलाइनों, पायलटों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तो होती है, पर निगरानी करने वाली संस्था डीजीसीए की चूक सामने आने पर उसकी जवाबदेही कौन तय करता है? पिछले कुछ सालों में 54 विमान हादसों की जांच रिपोर्टों में से 28 में डीजीसीए की खामियां उजागर हुई हैं जिसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या डीजीसीए और ऐसी घटनाओं पर निगरानी के लिए किसी स्वतंत्र निगरानी की जरूरत है। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने भी अपने एक अखबार द पायनियर को दिए अपने बयान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की कार्यप्रणाली और दुर्घटना जांच की सिफारिशों पर अमल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने वर्ष 2018 से 2025 के बीच हुई 54 दुर्घटनाओं की अंतिम जांच रिपोर्ट प्रकाशित की है। इनमें से 28 रिपोर्टों में डीजीसीए की तमाम खामियों का जिक्र है। इन 28 दुर्घटनाओं में 69 लोगों की मौत हुई और 99 गंभीर घायल हुए। सामने आई कमियों में अनुचित मंजूरी, सुरक्षा ऑडिट में खामियों की अनदेखी, अस्पष्ट नियम और कागजों पर निस्तारित दिखाए गए ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें वास्तविक जोखिम था।
अप्रैल 2019 के एक ऑडिट में हवाई अड्डे के अग्निशमन दल की परिचालन परिस्थितियों से परिचित होने की स्थिति को संतोषजनक बताया गया था। जांच में इस आकलन को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि 2010 के मंगलुरु विमान हादसे के बाद की गई कुछ सिफारिशों पर दस वर्षों तक कार्रवाई नहीं हुई थी। उस हादसे में 158 लोगों की जान गई थी।
सात अगस्त, 2020 को कोझिकोड में एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान संख्या 1344 टेबलटॉप रनवे से आगे निकल गई थी। हादसे में 21 लोगों की मौत हुई और 76 गंभीर रूप से घायल हुए। लेख में उद्धृत एएआईबी के निष्कर्षों के अनुसार, डीजीसीए उड़ान संबंधी आंकड़ों की निगरानी में कम अनुपालन स्वीकार करता रहा और सुरक्षा ऑडिट के मामलों को समुचित अनुवर्ती कार्रवाई के बिना बंद किया गया।
हेलीकॉप्टर संचालन और प्रशिक्षण संस्थानों पर भी सवाल
अक्टूबर 2022 में केदारनाथ के निकट गरुड़ चट्टी में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सात लोगों की मृत्यु हुई थी। एएआईबी ने केदारनाथ हेलीपैड से संबंधित नियमों को अस्पष्ट और सुरक्षित संचालन के अनुकूल नहीं पाया। अप्रैल 2023 में हेलीपैड पर एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद हुई जांच में भी सुरक्षा प्रावधानों पर सवाल उठे।
जून 2025 में गौरीकुंड के निकट एक अन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सात लोगों की मौत हुई। लेख के मुताबिक, एएआईबी की रिपोर्ट में कहा गया कि पहले उठाए गए कुछ मुद्दों को डीजीसीए के संशोधित परिपत्र में भी शामिल नहीं किया गया था।
अक्टूबर 2019 में तेलंगाना के सुल्तानपुर में प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से दो लोगों की मृत्यु हुई थी। दुर्घटना से तीन महीने पहले डीजीसीए ने संबंधित प्रशिक्षण संस्थान का ऑडिट किया था, जिसमें कोई खामी नहीं पाई गई। एएआईबी ने बाद की जांच में ऑडिट की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाए। वहीं, धनबाद में 2023 की दुर्घटना की जांच में संबंधित ग्लाइडिंग स्कूल की सुरक्षा निगरानी नहीं किए जाने की बात सामने आई।
सिफारिशों पर कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं
लेख के अनुसार, संबंधित अवधि की दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की अंतिम रिपोर्टों में कुल 606 सुरक्षा सिफारिशें की गईं। इनमें 259 डीजीसीए से संबंधित थीं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत डीजीसीए को 90 दिनों में जवाब देना होता है और एएआईबी को उसकी पर्याप्तता का आकलन करना होता है। हालांकि, लेखक का कहना है कि इन जवाबों और आकलनों को सार्वजनिक नहीं किया गया।
ग्यारह रिपोर्टों में पहले की सिफारिशें लागू नहीं होने का उल्लेख भी मिला। वर्ष 2024 में गुना में प्रशिक्षण विमान की दुर्घटना के बाद एएआईबी ने विमान और हवाई यातायात नियंत्रण के बीच रेडियो संवाद की रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की अपनी पुरानी सिफारिश दोहराई।
निरीक्षकों की कमी से बढ़ी चिंता
लेख में संसद की परिवहन संबंधी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच डीजीसीए के निरीक्षकों ने सुरक्षा संबंधी 4,692 खामियां दर्ज कीं। अप्रैल तक इनमें से 3,747 मामलों का निस्तारण नहीं हुआ था। इनमें 37 को तत्काल खतरे की श्रेणी में रखा गया था। डीजीसीए के 1,630 स्वीकृत पदों में से 787 पद रिक्त होने का भी उल्लेख किया गया है।
दुर्घटना जांच व्यवस्था में संसाधनों और स्वतंत्र विशेषज्ञता की कमी पर भी चिंता जताई गई है। कोझिकोड हादसे की जांच में एएआईबी के लिए स्थायी जांचकर्ताओं, विमानन चिकित्सा एवं मानवीय कारकों के विशेषज्ञों और उड़ान रिकॉर्डर की जांच के लिए पूरी तरह सुसज्जित प्रयोगशाला की जरूरत बताई गई थी।
जवाबदेही के लिए स्वतंत्र निगरानी की मांग
कैप्टन सिंह ने सुझाव दिया है कि डीजीसीए की चूक से संबंधित प्रत्येक जांच निष्कर्ष पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय 90 दिनों के भीतर सार्वजनिक जवाब दे। इसमें जिम्मेदारी और की गई कार्रवाई स्पष्ट हो। सुधारों की पुष्टि के लिए संसद को रिपोर्ट करने वाली स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जाए तथा प्रत्येक सुरक्षा सिफारिश, उस पर डीजीसीए का जवाब और क्रियान्वयन की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने उन दुर्घटनाओं की जांच में स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है, जिनमें डीजीसीए की अपनी भूमिका सवालों के घेरे में हो। लेख का मुख्य आग्रह है कि सुरक्षा खामियों को पहचानने के साथ उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी भी तय हो, ताकि अलग-अलग दुर्घटनाओं की रिपोर्टों में वही कमियां बार-बार सामने न आती रहें।
साभार- ‘द पायनियर’