नई दिल्ली, (एडीएनए)। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने भारत को पिछले दिनों तेजस के तीन और इंजन भेज दिए, इस तरह कंपनी भारत को अब तक तेजस के 10 इंजन भेज चुकी है लेकिन देश को यह विमान कब मिलेगा इसके बारे में कंपनी ने अभी तक कुछ नहीं बताया है।
दरअसल इंजन मिलने के बाद विमान में उसे लगाने, ग्राउंड टेस्टिंग और उड़ा परीक्षण जैसी जटिल प्रक्रिया में काफी समय लगता है, इसके लिए कंपनी ने फिलहाल पहले विमान की डिलीवरी की तस्वीर अभी तक साफ नहीं की है। एचएएल ने 48 हजार करोड़ कीमत वाले 83 तेजस विमानों का पहला आर्डर दिया है। इसके बाद सरकार की ओर से 97 और विमानों की मंजूरी के बाद अब कुल आर्डर 180 विमानों का हो गया है। तेजस मिलने में देरी के कारण वायुसेना की अपनी तैयारियों में दिक्कत आ रही है। रक्षा मंत्रालय ने भी देरी का जिक्र करते हुए इस पर आपत्ति दर्ज कराई है।
एचएएल से लेकर रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी को जल्द विमान मुहैया कराने की चेतावनी दी है, कहा गया है कि 10 इंजन तो मिल गए लेकिन अभी तक एक भी विमान तैयार नहीं हो पाया है। इधर एचएएल ने एसेंबली लाइनों पर काम शुरू कर दिया है, उसका दावा है कि हर साल वह 24 विमान तैयार करेगा लेकिन इसके लिए अमेरिका और समय पर और इंजन और विमान उपलब्ध कराने होंगे। अमेरिकी कंपनी की देरी के चलते वायुसेना का तेजस प्रोजेक्ट फेल हो रहा है और उसे अपनी अगली तैयारियों में दिक्कत आ रही है।