नई दिल्ली, न्यूज प्लस। तीन माह के लम्बे सीज फायर के बाद अमेरिका ने ईरान पर निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। इसके लिए अमेरिका ने अपने एप-22 रैप्टर समेत पांचवीं पीढ़ी के युद्धवर्षक विमानों को युद्ध में उतार दिया है। इन विमानों की मदद से अमेरिका ने 24 घंटे में ईरान के बंदर अब्बास समेत 140 सैन्य ठिकानों, एयरपोर्ट और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया।
सीज फायर समाप्त होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि वह ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा देंगे। उनके यह इरादे सामने दिखने भी लगे हैं। हर रोज 100 से ज्यादा हमलों में अमेरिका ने पांचवीं सदी फाइटर प्लेन उतार दिए हैं, ये बमवर्षक ईरनी रडार की पकड़ में नहीं आ रहे। अमेरिका का एफ-22 रैप्टर भी युद्ध में शामिल किया गया है, 24 घंटे के अंदर इस बमवर्षक ने ईरान में तबाही मचायी।
लॉकहीड मार्टन एफ-22 रैप्टर विमान सिर्फ अमेरिका के पास है और यह अमेरिकी वायुसेना का एक बड़ा हथियार है। यह द्विन इंजन वाला सुपरसोनिक स्टील्थ लड़कू विमान है और इसे मुख्य रूप से हवाई वर्टस्व हासिल करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जमीनी हमलों के साथ इलेक्ट्रानिक युद्ध में भी माहिर है। एफ-22 रैप्टर रडार शोषक कोटिंग्स के कारण दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आता। यह विमान बिना आफ्टरबर्नर का प्रयोग किए सुपरसोनिक गति से उड़ सकता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया गया है। एफ-22 रैप्टर दुनिया के सबसे मंहगे विमानों में से एक है, इसकी लागत करीब 1245 करोड़ रुपये है। अमेरिकी कानून के तहत इस विमान की तकनीक गोपनीय औऱ सुरक्षित रखी गई है, इसके निर्यात पर फिलहाल प्रतिबंध रखा गया है।
अमेरिका ने अभी इस बमवर्षक को किसी भी साथी देश यहां तक इजरायल तक को नहीं दिया है। इस लड़ाकू विमान की कई विशेषताएं हैं, यह किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आता और तबाही मचाने के बाद पलक झपकते ही ओझल हो जाता है। इसके अलावा भी अमेरिका ने अपने पांचवीं पीढ़ी के कई बमवर्षक युद्ध में झोंक दिए हैं।