नई दिल्ली, (एडीएनए)। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 किसी एयर टर्बुलेंस में नहीं फंसी थी बल्कि विमान में आयी तकनीकी खराबी से एक झटके में 300 फीट नीचे आ गई थी। पायलटों की सूझबूझ से विमान जमीन पर गिरने से तो बच गया लेकिन झटके के कारण कई यात्री सीटों से गिर गए और ऊपर रखा सामान नके ऊपर आ गिरा। एयरलाइन जो पहले इसे एयर टर्बुलेंस का नाम देकर अपनी कमजोरी से बच रही थी अब उसने घटना की रिपोर्ट से यह शब्द हटा लिया है। विमान में उस समय 137 याक्षी और 8 क्रू मेंबर सवार थे।
4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेट से आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट अचानक 300 फीट नीचे गिरी थी, इसमें 17 यात्री और क्रू मेंबर घाय़ल हुए थे। उस समय एयर इंडिया ने बताया था कि फ्लाइट एयर टर्बुलेंस में फंसने के कारण झटके से नीचे आ गई और उसमें कंपन हुआ। जांच में पता चला कि एयर टर्बुलेंस की बात गलत थी, वास्तव में विमान में ट्रिपल हाइड्रोलिक फेलियर और ऑटो-पायलट डिस्कनेक्ट जैसी गंभीर तकनीकी खराबी आयी थी। इस खुलासे के बाद न केवल भारत सरकार बल्कि डीजीसीए और उसमें सवार यात्री सकते में आ गए हैं। सभी का कहना है कि पायलटों ने सूझबूझ न दिखाई होती तो बड़ा हादसा सामने खड़ा था।
इतनी बड़ी तकनीकी खराबी का पता चलते ही पायलटों ने विमान की स्पीड बढ़ायी और कुछ मिनटों में ही दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग करा दी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रिपल हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने का मतलब है कि विमान को कंट्रोल पायलटों से बाहर हो सकता था और कोई भी बड़ा हादसा हो सकता था। अचानक ऑटो पायलट मोड डिसकनेक्ट होने का मतलब है कि पायलट सजग न होते को हादसा दय था। इंडिकेटर्स खराब होने से विमान तेजी से नीचे आया, समय रहते पायलटों ने इसे संभाला नहीं होता तो विमान और तेजी से नीचे आकर जमीन से टकरा सकता था। इतनी बड़ी तकनीकी खराबी क्यों, कैसे और किन परिस्थितियों में आयी अभी इसकी उच्च स्तरीय जांच जारी है।