नई दिल्ली, (एडीएनए)। केंद्र सरकार ने गरीबों का हवाई सफर का सपना पूरा करने के लिए उड़ान योजना शुरू की थी। मकसद था शूट-टाई वाले ही नहीं चप्पल और कुर्ता—ोती वाले किसान भी जहाज में बैठकर हवा से बातें करेंगे लेकिन यह योजना ऊंची उड़ान नहीं भर पायी। महंगे टिकट और यात्री कम होने से एयरलाइंस का खर्च तक हीं निकला जिसके कारण गरीबों का यह सपना टूट गया। सरकारन ने देश भर में 679 छोटे हवाई मार्ग इस योजना के तहत शुरू किए लेकिन इनमें 165 से ज्यादा शुरू होते ही बंद हो गए।
सरकार ने हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने और देश भर में हवाई अड्डों का जाल बिछाने के लिए छोटे हवाई अड्डे विकसित करन का फैसला किया है। इस योजना में कई नए हवाई अड्डे विकसित किए गए और कई नए हवाई रूट शुरू किए गए। जुलाई तक देश भर में पौने सात सौ से अधिक नए हवाई मार्ग इस योजना के तहत शुरू किए गए, लेकिन महंगे टिकट और यात्रियों की पर्याप्स संख्या न मिल पाने के कारण इनमें से 165 रूट शुरू होते ही बंद करने पड़े। इनमें से कई तो शुरू ही नहीं हो पाए।
अकेले उप्र में इस योजना में 18 एयरपोर्ट चिन्हित किए गए थे, लेकिन 6 से तो उड़ान ही शुरू ही नहीं हो पायी। इनमें कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद से फ्लाइट या तो शुरू नहीं हो सकी या फिर शुरू ते ही बंद हो गई। जहां से फ्लाइट चल भी रही हैं वहां संख्या लगातार घटती जा रही है। गाजियाबाद के हिंडन यरपोर्ट से उड़ानों की संख्या आधी रह गई है, उत्तराखंड के हवाई अड्डों का भी यही हाल है। यही नहीं हाल में शुरू जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट घटने लगी हैं। यहां से शरुआत में 17 शहरों के लिए उड़ान शुरू हो गई, जो घट कर 15 रह गई और प्रतिदिन 36 उड़ानों में से घटकर 28-30 ही रह गईं। उड़ान को नई उड़ान देने के लिए अब सरकार ने योजना में कुछ संशोधन किया है, अगले 10 वर्षों में 120 नए छोटे हवाई अड्डे शुरू करने की योजना तैयार की गई है।