नई दिल्ली, (एडीएनए)। एयर इंडिया की एक घटना ने देश भर के पायलटों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ी एयर इंडिया की फ्लाइट जिस समय संकट में फंसी उसका चालक गांजे के नशे में था। विमान में सवार यात्रियों के अनुसार वह लड़खड़ा रहा था और कॉकपिट में बैठने की स्थिति में नहीं था। यानी इस फ्लाइट में सफर कर रहे 137 यात्रियों और 8 क्रू मेंबरों की जान उसने खतरे में डाली थी, अब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने फैसला किया कि किसी भी फ्लाइट से पहले हर पायलट का ड्रग टेस्ट होगा।
सड़क पर नशे की हालत में वाहन चलाना आम बात है, जब भी कहीं चेकिंग होती है पचासों लोग पकड़े जाते हैं, लेकिन हजारों फीट ऊपर आकाश में पायलट नशे में विमान उड़ाएगा इसकी कल्पना भर से रूह कांप जाती है। पायलट के नशे का मतलब है कि उसमें सवार यात्रियों की जान भगवान भरोसे रहती है। फुकेट से दिल्ली के लिए जो फ्लाइट उड़ी थी, उसका मुख्य पायलट यानी कैप्टन ने ही गांजा पी रखा था। जिस समय फ्लाइट एयर टर्बुलेंस में फंसी और विमान में कई तकनीकी खराबियां आयीं उस समय यह पायलट अपनी सीट पर नहीं था, उसने किसी ऐसे व्यक्ति को विमान की कमान दे रखी थी जिसे विमान संचालन की कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे में आटो पायलेट सिस्टम खराब होने से यात्रियों की जान पर बन आयी।
इस एक घटना ने तमाम एयरलाइंस को अपने पायलटों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने 5000 से अधिक पायलटों का अनिवार्य रूप से ड्रग टेस्ट का फैसला किया है। गुरुवार से इस बड़े फैसले पर अमल भी शुरू हो गया है। फ्लाइट से ठीक पहले पायलटों का ड्रग टेस्ट दोनों एयरलाइंस ने शुरू कर दिया है, अब कोई नशा करके पायलट विमान में दाखिल नहीं हो पाएंगे।