नई दिल्ली, (एडीएनए)। फ्लाई दुबाई की फ्लाइट FJ 1073 पर सवार 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारत के हीरो स्मित मच्छार को पूरी दुनिया सलाम कर रही है लेकिन क्या विमान क्रैश हो जाता और सच्चाई सामने न आती तो उनको भी आतंकी मान लिया जाता और तब क्या पूरी दुनिया उनको गालियां दे रही होती। यह बड़ा सवाल है, मच्छार ने घायल होने के बावजूद 174 यात्रियों की जान बचाने के लिए अपने को दांव पर लगा दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि एक भारतीय अपने कर्तव्य के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करता लेकिन वह इसमें सफल नहीं होते डरकर तुरंत एक्शन में नहीं आते और विमान क्रैश हो जाता तो क्या उनको भी खलनायक मान लिया जाता..इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है।
ओमानी को-पायलट ने क्यों विमान क्रैश कराने की कोशिश की यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा लेकिन यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि यह पूरी तरह 9/11-2 की साजिश थी। बहादुर स्मित ने जिस तरह विमान को बचाने के लिए को पायलट से संघऱ्श किया वह बहादुरी ही नहीं 174 यात्रियों की जान बचाने का जज्बा था। को-पायलट के चाकू के हमले से लहूलुहान होने के बाद भी उन्होंने उससे जूझते हुए न केवल विमान को संभाला बल्कि हिम्मत करके कॉकपिट का लॉक खोला जिससे यात्री और क्रू मेंबर अंदर पहुंच सके और को पायलट को दबोच सके। अभी तक इस को-पायलट का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, बस बताया गया है कि वह ओमान का रहने वाला है।
ओमानी को-पायलट ने इतना तो कर ही दिया था कि विमान एक झटके में 17400 फीट नीचे आ गया था, स्मित ने बहादुरी के साथ त्वरित रूप से दिमाग का इस्तेमाल न किया होता तो को पायलट विमान क्रैश कराने में सफल हो जाता। जिस तेजी से विमान जमीन की तरफ नीचे आया था उसी तेजी से विमान जमीन से टकराता तो उसमें सवार कोई व्यक्ति शायद ही जिंदा बचता। स्मित मच्छार ने को पायलट से संघर्ष न किया होता और तुरंत एक्शन में न आते तो कॉकपिट के अंदर क्या हुआ यह बताने वाला कोई नहीं होता और शायद दोनों पायलटों को ही किसी आतंकी संगठन से जोड़ दिया जाता।
स्मित के साहस और सतर्कता को सबसे पहले उन यात्रियों ने सलाम किया जिन्होंने कहा एक बार तो ऐसा लगा था कि अब शायद की नहीं बचेगा। सभी यात्रियों की जान बचा स्मित मच्छार ने गंभीर घायल होने के बाद भी जब विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई तो सच्चाई पूरी दुनिया ने देखी। इसके लिए न केवल भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र दी ने उनको देश का हीरो बताते हुआ सलाम किया बल्कि इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहाकि घायल होने के बाद भी स्मित मच्छा ने जिस तरह सूझबूझ और अटूट संकल्प का परिचय दिया उससे बड़ा हादसा टल गया इसके लिए उनकी जितना प्रशंसा की जाए कम है। नेतन्याहू ने उनको सच्चा नायक बताया तो ट्रंप ने उन्होंने संकट में हीरो करार दिया। यूपी के सीएम समेत देश और दुनिया भर से तमाम लोगों ने उनको सलाम किया है।
कैप्टन स्मित मच्छार को बेहतर इलाज के लिए सउदी अरब के तबुक शहर से एयरलिफ्ट कर दुबई ले जाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। उनके जल्द स्व्स्थ्य होने के लिए भारत में पूजन-अर्चन और दुआओं का दौर जारी है। कई महानगरों में उनके लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गई हैं और लगातार उनके लिए दुआएं की जा रही हैं। स्मित मच्छार मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला के रहने वाले हैं और वर्तमान में उनका परिवार मुंबई के घाटकोपर में रह रहा है।