नई दिल्ली, (एडीएनए)। विमानों में तकनीकी खिमयों के चलते बड़े पैमाने पर फ्लाइट रद्द करने के साथ इमरजेंसी लैडिंग करानी पड़ रही है। इससे न केवल लाखों यात्रियों को हर माह भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है बल्कि उनकी जान को भी खतरा पैदा हो रहा है।
अगस्त 2026 की यातायात रिपोर्ट पर नजर डालें तो एक फीसदी से ज्यादा घरेलू उड़ानें किसी न किसी कारण रद्द हुईं, इसमें से आधी से ज्यादा विमानों में तकनीकी खराबी के चलते रद्द की गईं। साफ है विमानों में बड़ पैमाने पर तकनीकी खराबी आ रही है जिसके कारण उड़ानों को अचानक रद्द करना पड़ रहा है, यह तब हुआ जब टेकऑफ से पहले विमानों में तकनीकी खराबी का पता चल गया। कई बार टेकऑफ के बाद तकनीकी खराबी का पता चला जिससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ी और इमरजेंसी लैडिंग करानी पड़ी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में जो भी उड़ानें रद्द हुईं उनमें से 50.2 फीसदी विमानों में तकनीकी खराबी के कारण रद्द करनी पड़ीं। इसके अलावा परिचालन संबंधी कारणों से 20.4 फीसदी, मौसम खराब होने से 8.5 फीसदी और अन्य कारण 17.4 फीसदी रहे। वाणिज्यिक कारणों से भी 3.5 फीसदी उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। यात्रियों को न केवल उड़ानें रद्द होने के कारण परेशानियां झेलनी पड़ीं बल्कि बड़े पैमाने पर उड़ानों में घंटों देरी हुई।
विमानों में तकनीकी खराबी की बात करें तो दो दिन पहले ही उस समय यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई जब लंदन से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद इंडिगो विमान में तकनीकी खराबी आयी जिससे उड़ान भरने के बाद उसे बीच रास्ते से लौटाना पड़ा। उड़ान के एक घंटे बाद विमान को आपात स्थिति में लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। इस विमान ने मंगलवार देर रात उड़ान भरी थी, जब विमान इंग्लिश चैनल के ऊपर था उसमें धुआं देखा गया, इसके बाद पायलट ने आपात स्थिति की घोषणा की और करीब एक घंटे बाद विमान की वापस हीथ्रो हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। इस तरह के कई उदाहरण हैं जब विमानों में बड़ी तकनीकी खराबी आयी और यात्रियों की जान खतरे में पड़ी अंततः विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।